Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (सौभाग्य सूत्र) (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।
इन उपचारों के अतिरिक्त पांच उपचार, दश उपचार, बारह उपचार, अट्ठारह उपचार आदि भी होते हैं। लेकिन यहां 16 उपचारों की पूजन- सामग्री एवं उनका विधान अंकित किया जा रहा है। सामग्री को पूजा से पहले अपने पास रख लेना चाहिए। यहां सामग्री में हवन की सामग्री भी लिखी गयी है। यदि केवल पूजन ही करना हो तो वांछित सामग्री का चयन साधक अपनी सुविधा तथा उपलब्धता के अनुसार करके एकत्र कर लें।

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 Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

1. ध्यान-आवाहन– मन्त्रों और भाव द्वारा भगवान का ध्यान किया जाता है | आवाहन का अर्थ है पास लाना। ईष्ट देवता को अपने सम्मुख या पास लाने के लिए आवाहन किया जाता है। उनसे निवेदन किया जाता है कि वे हमारे सामने हमारे पास आए, इसमें भाव यह होता है। कि वह हमारे ईष्ट देवता की मूर्ति में वास करें, तथा हमें आत्मिक बल एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें, ताकि हम उनका आदरपूर्वक सत्कार करें। जिस प्रकार मनोवांछित मेहमान या मित्र को अपने यहां आया देखकर आनंद प्रसन्नता होती है।
2. आसन – देवी अथवा देवता को बैठने के लिए मानसिक रूप से आसन प्रदान करना।  
3. पाद्य– पाद्यं सम्मान सूचक है। ऐसा भाव करना है कि भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं |
4. अर्घ्य– अर्घ्य सम्मान सूचक है। ऐसा भाव करना है कि भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं |
5. आचमन– आचमन यानी मन, कर्म और वचन से शुद्धि आचमन का अर्थ है अंजलि मे जल लेकर पीना, यह शुद्धि के लिए किया जाता है। आचमन तीन बार किया जाता है। इससे मन की शुद्धि होती है।
6. स्नान– ईश्वर को शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है | एक तरह से यह ईश्वर का स्वागत सत्कार होता है | जल से स्नान के उपरांत भगवान को  पंचामृत स्नान कराया जाता है |
7. वस्त्र– ईश्वर को स्नान के बाद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, ऐसा भाव रखा जाता है कि हम ईश्वर को अपने हाथों से वस्त्र अर्पण कर रहे हैं या पहना रहे है, यह ईश्वर की सेवा है |
8. यज्ञोपवीत– यज्ञोपवीत का अर्थ जनेऊ होता है | भगवान को समर्पित किया जाता है। यह देवी को अर्पण नहीं किया जाता है। देवी को सौभाग्य सूत्र अर्पित किया जाता है।
9. गंधाक्षत – रोली, हल्दी,चन्दन, अबीर,गुलाल, अक्षत (अखंडित चावल )
10. पुष्प – फूल माला (जिस ईश्वर का पूजन हो रहा है उसके पसंद के फूल और उसकी माला )
11. धूप – धूपबत्ती
12. दीप – दीपक (शुद्ध घी का इस्तेमाल करें )
13. नैवेद्य  – भगवान को मिष्ठान का भोग लगाया जाता है इसको ही नैवेद्य कहते हैं |
14.ताम्बूल, दक्षिणा, जल -आरती – तांबुल का मतलब पान है। यह महत्वपूर्ण पूजन सामग्री है। फल के बाद तांबुल समर्पित किया जाता है। ताम्बूल के साथ में पुंगी फल (सुपारी), लौंग और इलायची भी डाली जाती है | दक्षिणा अर्थात् द्रव्य समर्पित किया जाता है। भगवान भाव के भूखे हैं। अत: उन्हें द्रव्य से कोई लेना-देना नहीं है। द्रव्य के रूप में रुपए,स्वर्ण, चांदी कुछ की अर्पित किया जा सकता है। आरती पूजा के अंत में धूप, दीप, कपूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती में एक, तीन, पांच, सात यानि विषम बत्तियों वाला दीपक प्रयोग किया जाता है। आरती चार प्रकार की होती है :– दीपआरती- जलआरती- धूप, कपूर,  पुष्प आरती
15. मंत्र पुष्पांजलि– मंत्र पुष्पांजलीमंत्रों द्वारा हाथों में फूल लेकर भगवान को पुष्प समर्पित किए जाते हैं तथा प्रार्थना की जाती है। भाव यह है कि इन पुष्पों की सुगंध की तरह हमारा यश सब दूर फैले तथा हम प्रसन्नता पूर्वक जीवन बीताएं।
16. प्रदक्षिणा-नमस्कार, स्तुति -प्रदक्षिणा का अर्थ है परिक्रमा | आरती के उपरांत भगवन की परिक्रमा की जाती है, परिक्रमा हमेशा क्लॉक वाइज (clock-wise) करनी चाहिए | स्तुति में क्षमा प्रार्थना करते हैं, क्षमा मांगने का आशय है कि हमसे कुछ भूल, गलती हो गई हो तो आप हमारे अपराध को क्षमा करें।

राजोपचार पूजन
राजोपचार पूजन में षोडशोपचार पूजन के अतिरिक्त छत्र, चमर, पादुका, रत्न व आभूषण आदि विविध सामग्रियों व सज्जा से की गयी पूजा राजोपचार पूजन कहलाती है |
राजोपचार अर्थात राजसी ठाठ-बाठ के साथ पूजन होता है, पूजन तो नियमतः ही होता है परन्तु पूजन कराने वाले के सामर्थ्य के अनुसार जितना दिव्य और राजसी सामग्रियों से सजावट और चढ़ावा होता है उसे ही राजोपचार पूजन कहते हैं |

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Baglamukhi Hridaya Stotram बगलामुखी हृदय स्तोत्र

Baglamukhi Hridaya Stotram बगलामुखी हृदय स्तोत्र

This Hymn  (Baglamukhi Hridaya Stotram) is considered to be heart of the Mother. Hymn’s follower attains whatever he see in this world.

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किसी भी देवी या देवता से सम्बन्धित हृदय-स्तोत्र देवता का हृदय ही होता है। यह स्तोत्र भगवती बगलामुखी से सम्बन्धित है। उनके हृदय में बस जाना या फिर उन्हें अपने हृदय में बसा लेना ये दोनों ही विकल्प इस पाठ का उद्देश्य हैं। उनके हृदय में निवास कर पाना तो एक स्वप्न मात्र ही है, क्योंकि इसके लिए तो परम शक्तिमान भी लालायित रहते हैं। हां, हमारी भक्ति के प्रसाद-स्वरूप यह फल अवश्य मिल सकता है कि ये विश्वाश्रय हमारे हृदय में बस जाएं और वास्तव में जीवन का यही तो लक्ष्य है; तभी तो हमारा उद्धार सम्भव है।
‘हृदय-स्तोत्र’ के द्वारा भगवती बगला की कृपा प्राप्त करने हेतु एक विशिष्ट प्रयोग है। आश्विन मास की महा-अष्टमी के दिन पीताचारी, पीताहारी होकर किसी प्राचीन शिवालय अथवा शक्तिपीठ में इस हृदय-स्तोत्र का अनुष्ठान संकल्प लेकर करें। इस प्रकार इस स्तोत्र का पाठ करने से मां पीताम्बरा की कृपा प्राप्त होती है और साधक के शत्रु पराभव को प्राप्त होते हैं। (यह अनुभूत प्रयोग है।) बगला-हृदय-स्तोत्र वास्तव में साधक के लिए ‘वांछाकल्पद्रुम’ के समान है। यूं तो इस पाठ के विषय में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान ही होगा, तो भी सामान्यतः कुछ विशिष्टताओं को स्पष्ट करना यहां उचित प्रतीत होता है।

यथा
1. यदि मात्र बगला-हृदय-स्तोत्र का ही पाठ कर लिया जाए तो फिर साधक को जप आदि अथवा अनुष्ठान की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
2. इस पाठ के स्मरण-मात्र से ही साधक के सभी अभीष्ट पूर्ण हो जाते हैं।
3. इस स्तोत्र का पाठ करने वाले के लिए इस पृथ्वी पर कुछ भी अप्राप्य नहीं रह जाता है।
4. इस स्तोत्र का तीनों समय पाठ करने के प्रभाव से गूंगा बोलने लगता है, पंगु चलने लगता है, दीन सर्वशक्तिमान हो जाता है; घोर दरिद्र व्यक्ति धनवान हो जाता है; चारों ओर से निन्दित व्यक्ति भी ख्याति प्राप्त कर लेता है; और मूर्खतम व्यक्ति की वाणी में ओज एवं कवित्व की शक्ति आ जाती है।
5. इस स्तोत्र के पाठ में ध्यान आदि आवश्यक नहीं है। जप, होम, तर्पण आदि की भी कोई आवश्यकता नहीं है।
6. इस स्तोत्र-पाठ के पाठी का उल्लंघन करने मात्र से स्वयं ब्रह्मा भी सकुशल नहीं रह सकते। यह स्तोत्र परम संतोष-प्रदायक एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है, क्योंकि यह साक्षात् मां बगला का हृदय है।

भगवती बगला के इस हृदय स्तोत्र से प्राप्त होने वाले अनेक परिणामों के विषय में मेरा सुखद अनुभव रहा है। इसलिए मैं ऐसे पाठकों/साधकों को भी इस स्तोत्र का अनुष्ठान करने का परामर्श दूंगा।

जो सब तरफ से निराश हो चुके हैं और जिनको कोई भी रास्ता स्पष्ट नहीं होता। उनसे मैं निवेदन करूंगा कि संकल्प लेकर कम से कम ग्यारह सौ स्तोत्रों का अनुष्ठान अवश्य करें।

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Shri Baglamukhi Tantram Book by Sri Yogeshwaranand & Sumit Girdharwal

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माँ पीताम्बरा की अनुकम्पा से ” श्री बगलामुखी तन्त्रम ” ग्रंथ का प्रकाशन संभव हुआ। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि यह आपके जीवन में आपका मार्गदर्शन करेगा।

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Sri Baglamukhi Panjar Stotram बगलामुखी पञ्जर स्तोत्र

Sri Baglamukhi Panjar Stotram बगलामुखी पञ्जर स्तोत्र

यह अति गोपनीय व रहस्यपूर्ण पञ्जर स्तोत्र अति दुर्लभ तथा परीक्षित है। इस पञ्जर का जप अथवा पाठ करने वाला साधक प्रत्येक क्षेत्र में सफलता का सोपान करता है। घोर दारिद्रय व विघ्नों के नाशक इस स्तोत्र का पाठ करने वाले साधक की माँ बगला स्वयं रक्षा करती हैं। शत्रु दल साधक को मूक होकर देखते रह जाते हैं।

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It is a very secret, mysterious and rare stotra of Devi Baglamukhi known as Panjar Stotram. It has been proved many times that it helped many people in getting success in their life. It is said that one who recite Panjar Stotra everyday Ma Baglamukhi protect him herself. This stotra is the giver of wealth, health and overall happiness in life.

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Devi Baglamukhi Jayanti देवी बगलामुखी जयंती

Baglamukhi Jayanti

3 May 2017 (वैशाख शुक्ल अष्टमी) को देवी बगलामुखी जयंती  (अवतरण दिवस)  है। आप सभी को बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।  आप माँ पीताम्बरा की कृपा से सदैव प्रसन्न रहें एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहें यही माँ बगलामुखी से हमरी विनती है।  जय माता दी।

यह दिन सभी भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखता है और प्रत्येक भक्त ऐसे शुभ दिन पर माँ की अधिक से अधिक कृपा प्राप्त करना चाहता है।  यहाँ आपको बताते है कि कैसे आप भी माँ की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते है।

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Baglamukhi Jayanti Pooja Vidhi (बगलामुखी जयंती पूजा विधि )

बगलामुखी जयंती की यह पूजा कोई भी व्यक्ति कर सकता है चाहे वह दीक्षित है अथवा नहीं।  यह पूजा आप सुबह में अथवा रात्रि में करें।  माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है,  इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। पीले रंग का आसन  लेकर उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुखे करके बैठ जाएं। अपने सामने माँ बगलामुखी का चित्र अथवा यन्त्र रख लें।  यदि आपके पास यह सामग्री नहीं है तो इस पूजा को आप माँ दुर्गा के चित्र के सामने भी कर सकते हैं।

गाय के शुद्ध घी , सरसो अथवा तिल के तेल से दीपक जलाएं।  सर्वप्रथम अपने गुरुदेव का ध्यान करें एवं गुरु मंत्र का जप करें। जिनके पास गुरु मंत्र नहीं है वो “ॐ श्री गुरुवे नमः” का ११ बार जप कर सकते है।  इसके पश्चात गणेश जी का ध्यान करके “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।  इसके पश्चात भैरव जी से माँ बगलामुखी की पूजा करने की आज्ञा लें – ” हे ! भैरव भगवान् मैं माँ पीताम्बरा की पूजा करने जा रहा/रही हूँ, कृपया मुझे अनुमति प्रदान करें। ” ऐसा बोलकर भैरव जी का ध्यान करें।  इसके बाद माँ बगलामुखी का ध्यान करें एवं उनका आवाहन करें। माँ को पीला प्रसाद चढ़ाएँ जैसे बादाम, किशमिश, मौसमी फल अथवा जो आपका दिल करे ( एक बच्चा अपनी माता को प्रेम से जो भी अर्पित कर देगा, माता प्रेम से वही स्वीकार कर लेगी )। उन्हें पुष्प समर्पित करें। इसके पश्चात माँ बगलामुखी सहस्रनाम (१००० नाम ) का पाठ करें और यदि हो सके तो प्रत्येक नाम के साथ माँ को पीला पुष्प अथवा बादाम या किशमिश समर्पित करें। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको माता का चित्र एक बड़े थाल अथवा बड़े कपडे पर रखना होगा ताकि सामग्री बाहर जमीन पर न गिरे। जिनके पास कम समय है वो बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम (१०८ नाम ) का पाठ भी कर सकते है।  ये पाठ आप हमारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं जिनका लिंक हम निचे दे रहे हैं। आप जितना अधिक पूजा करना चाहे आप कर सकते हैं लेकिन ज्यादा न कर सको तो कम से कम माँ को प्रेम से एक पुष्प जरूर चढ़ा देना।




जो लोग दीक्षित है वो इसके बाद माँ बगलामुखी के मंत्र का जप हल्दी माला पर कर सकते हैं। जिन लोगो ने अभी तक माँ बगलामुखी की दीक्षा नहीं ली है वो इस दिन माँ बगलामुखी की दीक्षा ग्रहण कर सकते हैं।  पूजा समाप्त करने के पश्चात माँ बगलामुखी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे एवं सदैव आपके परिवार के ऊपर कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।  इसके बाद एक माला मृत्युंजय मंत्र – ” हौं जूंं  सः ” का जप अवश्य करें।  पूजा करने के बाद प्रसाद सभी को बांट दें।

यदि किसी कारणवश आप स्वयं इस पूजा को नहीं कर सकते और आप अपने परिवार की सुख शान्ति, शत्रु पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यह पूजा करना चाहते है तो हमने ऐसे  लोगों के लिए कल विशेष पूजा का आयोजन किया है।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9410030994, 9540674788

 

Any one can do baglamukhi jayanti pooja whether he is initiated or not in baglamukhi mahavidya. This pooja can be done in morning or night. Everything should be yellow in baglamukhi pooja like clothes, prasaad, mat etc as one of the other name of devi baglamukhi is “Pitambara” which means yellow.

You should perform this pooja in front of devi baglamukhi photo or yantra. Your face should be in north or east direction. First do guru mantra “Om Sri Guruvey Namah” or if you gurudev has given you.

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Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan बगलामुखी मंत्रोंत्कीलन-विधान

Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan

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मंत्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए कलियुग के प्रारम्भ में भगवान शिव ने सभी मंत्रों का कीलन (शापित) कर दिया था। तब माँ पार्वती के अनुग्रह करने पर उन्होंने मंत्रों को उत्कीलित करने का विधान भी प्रस्तुत किया ताकि सत्पात्र एवं अधिकारी साधक भी मंत्र की सिद्धि प्राप्त कर सकें। यही मंत्रोंत्कीलन-विधान मंत्र-उपासना के अंग के रूप में उत्कीलक कहे जाते हैं। इसलिए साधक को कवच आदि का पाठ करने से पूर्व उत्कीलन करना चाहिए।
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Baglamukhi Panchastra Mantra Sadhana Evam Siddhi

Baglamukhi Panchastra Mantra Sadhana Evam Siddhi ( बगलामुखी पंचास्त्र मंत्र साधना एवं सिद्धि )

भगवती बगलामुखी के पांच विशिष्ट उग्र मंत्र  हैं, जिन्हें ‘पंचबाण’ अथवा ‘पञ्चास्त्र’ कहा जाता है। ये पांचों मन्त्र इतने प्रभावी हैं कि इनके प्रभाव से शत्रु -समूह उसी प्रकार नष्ट हो जाता है, जिस प्रकार जंगल में लगी भयानक अग्नि से सब कुछ भस्म हो जाता है। वास्तव में इन पंचास्त्रो  के विषय में कुछ भी कहना सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। इन अस्त्रों को सिद्ध करने वाला साधक महासिद्ध कहलाता है। अघोरास्त्र, पाशुपतास्त्र जैसे दिव्य अस्त्रों का स्तम्भन करने में भी ऐसा साधक सक्षम हो जाता है।

बगलामुखी पंचास्त्र  के प्रयोग

1. वडवामुखी अथवा वडवास्त्र रण-स्तम्भन कारक है।
2. उल्कामुखी अस्त्र तीनों लोकों का स्तम्भन करने में सक्षम है।
3. ज्वालामुखी अस्त्र देवताओं तथा ऋषियों का स्तम्भन करने में समर्थ है।
4. ब्रह्मा-विष्णु-महेश का स्तम्भन एवं उनसे रक्षा हेतु ‘जातवेदमुखी’ का प्रयोग किया जाता है।
5. सभी प्रकार के काम्य प्रयोगों की सिद्धि के लिए ‘वृहदभानुमुखी’ अस्त्र का प्रयोग किया है, क्योंकि यह इतना तीखा और प्रभावशाली है कि इसके प्रयोग से सवा करोड़ त्रिपुरा समुदाय का, 50 करोड़ भैरव का, राक्षसों का, नारसिंह का तथा करोड़ों पूतनाओं का स्तम्भन बिना किसी विशेष प्रयास के ही हो जाता है।

There are five very powerful mantras of bhagwati baglamukhi known as Panchabana or Panchastra. These five mantras are so effective that all the group of enemies of the sadhak are destroyed like fire destroys the complete forest. Person who get the siddhi of these five astras is known as Maha Siddha. This sadhak is capable of stoping Aghorastra and Pashupatastra

These are the names of Baglamukhi Panchastra –

Vadvamukhi Mantra (वडवामुखी मंत्र)

Ulkamukhi Mantra (उल्कामुखी मंत्र)

Jaatvedamukhi Mantra (जातवेदमुखी मंत्र)

Jwalamukhi Mantra (ज्वालामुखी मंत्र )

Vrahadbhanumukhi Mantra (वृहदभानुमुखी मंत्र)

 

Baglamukhi Panchastra Mantra Prayoga & Benefits-

  1. Vadvamukhi or vadvastra can stop war.
  2. Ulkamukhi Astra can restrain the all three worlds.
  3. Jwalamukhi Astra can restrain Devata & Rishi.
  4. Jaatvedamukhi Astra can restrain Brahma-Vishnu-Mahesh
  5. Vrahadbhanumukhi Astra is used for all kind of siddhis.

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Baglamukhi Panchastra Mantra Pdf Image Part 1

 

Baglamukhi Panchastra Mantra Hindi & Sanskrit Pdf Image

 

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Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra बगलामुखी सर्वकार्य सिद्धि मंत्र

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Baglamukhi Sarva Karya Siddhi Mantra

बगलामुखी देवी का यह मंत्र सभी  कार्यों की सिद्धि प्रदान करने वाला है। दीक्षा लेकर ही इस मंत्र का जाप करें।




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Shatkarma Vidhaan Book षट्कर्म विधान

Shatkarma Vidhaan Book षट्कर्म विधान

Shatkarma Vidhaan Book Written By Sri Yogeshwaranand Ji & Sumit Girdharwal Ji. This book provides indepth knowledge of Mantras Tantras & Yantras. It provides most powerful mantras of different fields. You can buy this book from eBay –

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Main Topics covered in this book –

Ganapati Prayoga  ( गणपति प्रयोग ) , Hanumat Prayoga ( हनुमत प्रयोग ) , Baglamukhi Prayoga ( बगलामुखी प्रयोग ) , Dhanada Yakshini Prayoga ( धनदा यक्षिणी प्रयोग ) , Pratyangira Prayoga ( प्रत्यंगिरा प्रयोग ), Aghori Prayoga ( अघोरी प्रयोग ) , Saundarya Lehri Ke Tantrik Prayoga  (  सौर्न्दर्य लहरी के तांत्रिक प्रयोग ) , Durga Tantra Prayoga ( दुर्गा तंत्र प्रयोग ) , Pitambara Panchastra Prayoga , Dhumavati Tantra Prayoga, Kaalratri Prayoga , Bhairav Prayoga , Navarna Mantra Prayoga , Shanti, Vashikaran (Mohan & Akarshan) , Stambhan, Uchatan, Vidweshan, Maran hetu mishra prayoga, Vishwavasu Gandharvaraaj Prayoga

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Index of book

Chapter 1 : Shatkarma Vidhaan

stambhan, mohan, uchattan, vashyakarshan, jrambhan, vidweshana, marana, shantikarana, paustik, santanik, shatkarmo ke devata, shatkarmo ki disha, ritukaal nirnaya, ek din me chaho rituo ka samay,

Chapter 2 : Mantra Siddhi Rahasya

Chapter 3 : Mantra Yoga

Chapter 4 : Mala Sanskaar

Chapter 5:  Shabar Mantra Siddhi Vidhaan

Chapter 6 : Yagya Evam Kunda

Chapter 7 :  Shanti Karma

Chapter 8 :  Vashikaran Prayoga

Chapter 9 : Stambhana Karma

Chapter 10 : Vidweshan Karma

Chapter 11 : Uchattana Karma

Chapter 12 : Dhumavati Tantra

Chapter 13 :  Kaalratri Tantra

Chapter 14 : Shatru samhaar Tantra

Chapter 15 :  Mishra Prayoga

Chapter 16 : Jain Dharm ke kuch prabhaavshali mantra

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Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच)

Baglamukhi Kavach ( बगलामुखी कवच )

मां बगलामुखी के प्रत्येक साधक को प्रतिदिन जाप प्रारम्भ करने से पहले इस कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए । यदि हो सके तो सुबह दोपहर शाम तीनों समय इसका पाठ करें । यह कवच विश्वसारोद्धार तन्त्र से लिया गया है। पार्वती जी के द्वारा भगवान शिव से पूछे जाने पर भगवती बगला के कवच के विषय में प्रभु वर्णन करते हैं कि देवी बगला शत्रुओं के कुल के लिये जंगल में लगी अग्नि के समान हैं। वे साम्रज्य देने वाली और मुक्ति प्रदान करने वाली हैं।

Baglamukhi Kavach Benefits in Hindi

भगवती बगलामुखी के इस कवच के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। इस कवच के पाठ से अपुत्र को धीर, वीर और शतायुष पुत्र की प्राप्ति होति है और निर्धन को धन प्राप्त होता है। महानिशा में इस कवच का पाठ करने से सात दिन में ही असाध्य कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। तीन रातों को पाठ करने से ही वशीकरण सिद्ध हो जाता है। मक्खन को इस कवच से अभिमन्त्रित करके यदि बन्धया स्त्री को खिलाया जाये, तो वह पुत्रवती हो जाती है। इसके पाठ व नित्य पूजन से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है, नारी समूह में साधक कामदेव के समान व शत्रओं के लिये यम के समान हो जाता है। मां बगला के प्रसाद से उसकी वाणी गद्य-पद्यमयी हो जाती है । उसके गले से कविता लहरी का प्रवाह होने लगता है। इस कवच का पुरश्चरण एक सौ ग्यारह पाठ करने से होता है, बिना पुरश्चरण के इसका उतना फल प्राप्त नहीं होता। इस कवच को भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष को दाहिने हाथ में व स्त्री को बायें हाथ में धारण करना चाहिये

भगवती बगलामुखी की उपासना कलियुग में सभी कष्टों एवं दुखों से मुक्ति प्रदान करने वाली है। संसार में कोई कष्ट अथवा दुख ऐसा नही है जो भगवती पीताम्बरा की सेवा एवं उपासना से दूर ना हो सकता हो, बस साधकों को चाहिए कि धैर्य पूर्वक प्रतिक्षण भगवती की सेवा करते रहें।

(कृपया दीक्षित साधक ही इसका जप करें। जिनकी दीक्षा नही हुई है वो सबसे पहले दीक्षा ग्रहण करें )

Baglamukhi Kavach Benefits

Every baglamukhi sadhak (upasak) should chant this baglamukhi kavach everday before starting his mantra jaap. If possible please do this kavach three times a day morning, afternoon and evening. This kavach is taken from Vishvasarodhaar Tantra. Lord shiva said to Devi Parvati that Devi Baglamukhi destroys enemies of a sadhak like a fire destroys the complete forest. She is giver of Empire (kindom) & Salvation ( Moksha – Mukti). There are so many benefits of reciting this kavach which are given in this kavach itself. By reciting this kavach one gets a courageous son which lives for 100 years.

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जो लोग भगवती बगलामुखी साधना में दीक्षित नहीं हैं वो बगलामुखी कवच अपने हाथ में धारण कर सकते हैं। इस कवच को प्राप्त करने का शुल्क 2100/= है।

जो लोग भूत प्रेत बाधा अथवा शत्रुओ द्वारा किये गए अभिचारिक कर्मो से ग्रसित है उन्हें बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच धारण करना चाहिए एवं बगलामुखी व प्रत्यंगिरा दीक्षा लेकर उनकी साधना करनी चाहिए। बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच का शुल्क 5100/= है।

कवच प्राप्त करने के लिए निचे लिखी जानकारी हमे  9540674788 (whatsapp) अथवा  shaktisadhna@yahoo.com पर भेजें
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२. आपके माता पिता का नाम
३. आपका गोत्र
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